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विशेष उपाय

हिन्दू धर्म में आचरण के सख्त नियम हैं जिनका उसके अनुयायी को प्रतिदिन जीवन में पालन करना चाहिए। यह सनातन हिन्दू धर्म का नैतिक अनुशासन है। इसका पालन करने वाला जीवन में हमेशा सुखी और शक्तिशाली बना रहता है। यम और नियम को आचरण संहिता में शामिल किया गया है लेकिन इसके अलावा भी आचरण के अन्य नियम हैं। यहां हम आचरण के अलावा आचरण से हटकर भी कुछ बातों का उल्लेख करेंगे।

कहते हैं‍ कि जब जिंदगी में व्यक्ति संकटों से घिर जाता है तभी उसे भगवान की ज्यादा याद आती है। कई बार वह देवी और देवताओं की खूब प्रार्थना करता है फिर भी उसके संकट समाप्त नहीं होते। फिर वह किसी ज्योतिष, गुरु या बाबाओं के चक्कर लगाने लगता है, लेकिन वह छोटी-सी बात भी नहीं जानता है कि आखिर समस्या का समाधान क्यों नहीं हो रहा। वह इसलिए कि व्यक्ति जीना चाहता है अपने तरीके से। पाश्‍चात्य जीवनशैली के चलते व्यक्ति का उससे उसका धर्म छूट गया है।

हिन्दू धर्म में रविवार और गुरुवार को पवित्र और सर्वश्रेष्ठ दिन माना जाता है। इस दिन मंदिर जाने का महत्व अधिक है। दोनों में गुरुवार को प्रथम माना गया है। प्रतिदिन मंदिर जाने से सकारात्मक भावना का विकास होगा और यह आपके मन और मस्तिष्क के लिए जरूरी है। यह भावना कई तरह के संकटों से बचा लेती है।

  • 1. कर्पूर जलाना : प्रतिदिन सुबह और शाम घर में संध्यावंदन के समय कर्पूर जरूर जलाएं। हिन्दू धर्म में संध्यावंदन, आरती या प्रार्थना के बाद कर्पूर जलाकर उसकी आरती लेने की परंपरा है। पूजन, आरती आदि धार्मिक कार्यों में कर्पूर का विशेष महत्व बताया गया है। रात्रि में सोने से पूर्व कर्पूर जलाकर सोना तो और भी लाभदायक है।


    घर के वास्तुदोष को मिटाने के लिए कर्पूर का बहुत महत्व है। यदि सीढ़ियां, टॉयलेट या द्वार किसी गलत दिशा में निर्मित हो गए हैं तो सभी जगह 1-1 कर्पूर की बट्टी रख दें। वहां रखा कर्पूर चमत्कारिक रूप से वास्तुदोष को दूर कर देगा।

  • 2. हनुमान चालीसा पढ़ना : प्रतिदिन संध्यावंदन के साथ हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए। संध्यावंदन घर में या मंदिर में सुबह-शाम की जाती है। पवित्र भावना और शांतिपूर्वक हनुमान चालीसा पढ़ने से हनुमानजी की कृपा प्राप्त होती है, जो हमें हर तरह की जानी-अनजानी होनी-अनहोनी से बचाती है।

  • 3. नारियल का उतारा : पानीदार एक नारियल लें और उसे अपने ऊपर से 21 बार वारें। वारने के बाद उसे किसी देवस्थान पर जाकर अग्नि में जला दें। ऐसा परिवार के जिस सदस्य पर संकट हो उसके ऊपर से वारें। उक्त उपाय किसी मंगलवार या शनिवार को करना चाहिए। 5 शनिवार ऐसा करने से जीवन में अचानक आए कष्ट से छुटकारा मिलेगा। यदि किसी सदस्य की सेहत खराब है तो ऊसके लिए यह ऊपाय उत्तम है।

  • 4. शास्त्रोक्त समय का रखें ध्यान : पूर्णिमा और अमावस्या : मान्यता के अनुसार कुछ खास दिनों में कुछ खास कार्य करने से बचना चाहिए। खास कार्य ही नहीं करना चाहिए बल्कि अपने व्यवहार को भी संयमित रखना चाहिए। जानकार लोग तो यह कहते हैं कि प्रतिपदा, ग्यारस, तेरस, चौदस, पूर्णिमा, अमावस्या, चंद्रग्रहण, सूर्यग्रहण उक्त 8 दिन पवित्र बने रहने में ही भलाई है, क्योंकि इन दिनों में देव और असुर सक्रिय रहते हैं। इसके अलावा सूर्योदय के पूर्व और सूर्यास्त के बाद भी सतर्क रहने की जरूरत है। सूर्यास्त के बाद दिन अस्त तक के काल को महाकाल का समय कहा जाता है। सूर्योदय के पहले के काल को देवकाल कहा जाता है। उक्त काल में कभी भी नकारात्मक बोलना या सोचना नहीं चाहिए अन्यथा वैसा ही घटित होने लगता है।

  • 5. गाय, कुत्ते, चींटी और पक्षियों को भोजन खिलाएं : वृक्ष, चींटी, पक्षी, गाय, कुत्ता, कौवा, अशक्त मानव आदि प्राणियों के अन्न-जल की व्यवस्था करने से इनकी हर तरह से दुआ मिलती है। इसे वेदों के पंचयज्ञ में से एक 'वैश्वदेव यज्ञ कर्म' कहा गया है। यह सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।


  • कछुओं और मछलियों को नित्य आटे की गोलियां खिलाएं और चीटियों को भुने हुए आटे में बूरा मिलाकर बनाई पंजीरी खिलाएं।

  • प्रतिदिन कौवे या पक्षियों को दाना डालने से पितृ तृप्त होते हैं।

  • प्रतिदिन चींटियों को दाना डालने से कर्ज और संकट से मुक्ति मिलती है।

  • प्रतिदिन कुत्ते को रोटी खिलाने से आकस्मिक संकट दूर रहते हैं।

  • प्रतिदिन गाय को रोटी खिलाने से आर्थिक संकट दूर होता है।

  • 6. जल अर्पण : एक तांबे के लोटे में जल लें और उसमें थोड़ा-सा लाल चंदन मिला दें। उस पात्र को अपने सिरहाने रखकर रात को सो जाएं। प्रात: उठकर सबसे पहले उस जल को तुलसी के पौधे में चढ़ा दें। ऐसा कुछ दिनों तक करें। धीरे-धीरे आपकी परेशानी दूर होती जाएगी।

  • 7. हनुमानजी को चढ़ाएं चोला : बार हनुमानजी को चोला चढ़ाएं, तो तुरंत ही संकटों से मुक्ति मिल जाएगी। इसके अलावा प्रति मंगलवार या शनिवार को बढ़ के पत्ते पर आटे का दीया जलाकर उसे हनुमानजी के मंदिर में रख आएं। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार या शनिवार को करें

  • 8. छाया दान करें : शनिवार को एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का (रुपया-पैसा) डालकर उसमें अपनी परछाई देखें और तेल मांगने वाले को दे दें या किसी शनि मंदिर में शनिवार के दिन कटोरी सहित तेल रखकर आ जाएं। यह उपाय आप कम से कम पांच शनिवार करेंगे तो आपकी शनि की पीड़ा शांत हो जाएगी और शनिदेव की कृपा शुरू हो जाएगी।

  • 9. जप से मिलेगी संकटों से मुक्ति : सभी तरह के बुरे काम छोड़कर प्रतिदिन राम के नाम, गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप शुरू कर दें। ध्यान रहे इसमें से किसी एक मंत्र का जाप ही करें। कम से कम 43 दिनों तक लगातार इसका जाप सुबह और शाम नियम से करें। इस जाप का असर जब शुरू होगा तो संकट भी धीरे धीरे दूर होने लगेगा। उक्त जाप के दौरान झूठ न बोलें, तामसिक भोजन न करें और किसी भी प्रकार का नशा न करें अन्यथा इसके बुरे परिणाम भी हो सकते हैं। राम का नाम तो आप दिनभर जप सकते हैं। कलियुग में राम के नाम से बड़ा कोई उपाय नहीं।

  • 10. रंगदार और साफ-सुथरे कपड़े पहनें : कार्य में रुकावट या सफलता में आपके घर और कपड़े के रंग का भी बहुत योगदान रहता है। कभी भी हल्के, काले, कत्थई, भूरे और मटमैले रंग के कपड़े न पहनें। अधिकतर सफेद, नीले, लाल, हरे और गुलाबी रंग के कपड़े ही पहनें।